धर्म शास्त्र कथा के अनुसार जो लोग गुरुवार के दिन भक्ति और निष्ठा के साथ व्रत करते हैं उनका मनोकामना पूर्ण होती है साथ साथ समाज में उनका सम्मान बढ़ता हैं और हमेशा संकट से मुक्ति मिलती हैं । लेकिन व्रत पालन करने वाले व्यक्ति को इन बातों को ध्यान में रखना चाहिए । जो नियम के अनुसार विधि का पालन करते हैं उनका मन इच्छा कृपा आसानी से प्राप्त होता है । अगर आप व्रत करते समय इन गलतियों को दोहराते हैं तो आपके लिए नुकसान भी हो सकता हैं इसलिए विधि और नियम के साथ व्रत का पालन करना चाहिए ।
गुरुवार के दिन व्रत करने वाले व्यक्ति अपने सर के बाल और दाढ़ी गलती से भी ना कटे । ऐसे करने वाले व्यक्ति को बहुत बड़ा अमंगल होगा ।
गुरुवार के दिन घर धोना नहीं चाहिए और ना ही पोछा लगाना चाहिए, इस दिन घर के कबार भी बाहर फेंकना नहीं चाहिए शास्त्र के अनुसार वर्जित माना गया है । गुरुवार के दिन भोजन में नमक ना खाएं ।
गुरुवार के दिन भगवान विष्णु माता लक्ष्मी की जो फूल अर्पित करके पूजा करें ।
गुरूवार के दिन सुबह स्नान आदि करके शरीर शुद्ध बनाइए और बृहस्पति देव की पूजा करें. पूजन में हल्दी रंगों का वस्तुएं, पीले फूल, चने की दाल, मुनक्का, हल्दी रंगों का मिठाई, हल्दी कलर का चावल और हल्दी चढ़ाएं. गुरुवार के दिन केले के पेड़ की भी पूजा अवश्य करें. कथा पढ़ते और पूजन के समय सच्चे भक्ति से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना अवश्य करें.
जल में haldi मिलाकर केले के पेड़ पर चढ़ाएं और केले की जड़ में चने की दाल और मुनक्का चढ़ाना चाहिए. उसके बाद उसी जगह पर दीपक जलाकर पेड़ की आरती करें. गुरूवार के व्रत में दिन में एक समय ही भोजन करना चाहिए. पूजन के बाद भगवान भगवान विष्णु माता लक्ष्मी जी की कथा सुननी चाहिए ।
पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं ? जानें
दोस्तों अब आगे बात करते हैं जब आपके पीरियड के समय होते हैं । तब उस समय आपके शरीर से गंदगी बाहर निकलते हैं आपको तो खुद ही गंदगी महसूस होते होंगे तो क्या आप एक पवित्र स्थान पर जा सकते हैं । भगवान सबका एक है,और भगवान का भक्त भी भगवान के पास एक ही है । हमेशा ईश्वर अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं । जब आपका यह स्थिति है तो इस समय अपने ईस्ट के पास न जाए इससे आपके मन शुद्धता रहेंगे और कोई बात नहीं । मंदिर एक पवित्र स्थान है जहां आप एक पवित्र स्थान पर जाकर आपके मन खुद ही अशुद्धता रहेंगे तो आपका पूजा भी संपन्न नहीं होंगे । जिसके कारण सदा बड़े विद्वान भी मना करते हैं । यह चार दिन आप अपने घर में रहेऔर अपने इष्ट को मन ही मन पुकारते रहे ।
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